उपभोक्ता मामलों में शिकायत कैसे करें ?
परेशानियां जीवन का हिसा होती हैं, जीवन में परेशानियों का भी उतना अस्तित्व है, सांसों का... जीवन को सही और संतुलित तरीके से किया जाए तो हम बहुत सी मुसीबतों में पड़ने से बच सकते हैं... लेकिन कई बार लाख सावधानी के बाद भी हम समस्या में पड़ ही जाते हैं... ऐसे में हम अपने या दूसरों के अनुभव से परेशानी से बचकर निकल सकते हैं... या उस परेशानी की वजह से हुए नुकसान की भरपाई कर सकते हैं या अपनी समझदारी से किसी भी गलत इंसान या संघठन को सबक सीखा सकते हैं... बाजारवाद के इस युग में हम ठगी से नहीं बच सकते... क्योंकि जरूरत का सामान खरीदना ही होगा, ऐसे में कंपनियां या दुकानदार किसी न किसी रूप में उपभोक्ता यानी कंज्यूमर से बदमाशी किए बिना नहीं रहेगी...
आज हम इस बात को समझने की कोशिश करेंगे कि कंपनी या दुकानदार से हुई ठगी का मुहावजा या उसे सबक कैसे सीखा सकते हैं...!
सबसे पहले कुछ सामान्य बातों को समझ लेते हैं, जैसे हम लोग बाजार से या ऑनलाइन प्लेटफार्म से कुछ ना कुछ खरीदते ही रहते हैं... जैसे ही हम कोई वस्तु कहीं से खरीदते हैं, हम ग्राहक या कंज्यूमर बन जाते हैं... कंज्यूमर प्रोडक्शन 1986 के अनुसार हम अपने खुद के प्रयोग के लिए कोई वस्तु या सेवा खरीदते हैं तो हम ग्राहक या कंज्यूमर कहलाते हैं...!
कंज्यूमर फोरम
कंज्यूमर फोरम एक सरकारी संस्था है, जिसमें हम विक्रेता यानी सेलर के विरुद्ध शिकायत कर सकते हैं...!
शिकायत किसके खिलाफ की जा सकती है ?
- दुकानदार
- कंपनी
- सर्विस प्रोवाइडर... जैसे सेल्यूलर कंपनीज, या इंटरनेट प्रदाता या केबल ऑपरेटर आदि.
- पीड़ित व्यक्ति
- कोई भी फर्म चाहे रजिस्टर्ड हो या न हो
- कॉपरेटिव सोसाइटी या कोई ऐसा ही ग्रुप
- राज्य सरकारें या केंद्र सरकार
- कंज्यूमर की मौत होने पर उसका कानूनी वारिस
- शिकायत में शिकायत कर्ता व जिसके खिलाफ शिकायत की जा रही है उसका पता
- शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में दस्तावेज... जैसे कैश मीमो, रसीद, कोई एग्रीमेंट आदि.
- कोर्ट से आप क्या चाहते है, जैसे मुहावजा, मानसिक परेशानी के लिए अतिरिक्त हर्जाना आदि का पूरा विवरण
- एप्लीकेशन के साथ अपनी शिकायत की 3 कॉपी
- तय फीस के लिए सरकार या कोर्ट के पक्ष में एक पोस्टल आर्डर का डिमांड ड्राफ्ट.
ऐसे मामलों में वकील की जरूरत नहीं होती है, सिर्फ शिकायत पत्र पर शिकायत कर्ता के हस्ताक्षर होने चाहिए, इतने में मामला बन जात है..!
शिकायत कहां की जाती है...?
- सामान की कीमत 20 लाख से कम हो तो जिला उपभोक्ता अदालत में शिकायत की जाती है.
- सामान की कीमत 20 लाख से ज्यादा और एक करोड़ से कम हो तो राज्य कमिशन आयोग में
- सामान की कीमत 1 करोड़ से ज्यादा हो तो राष्ट्रीय कमिशन बोर्ड में
प्रत्येक जिले में एक फाइलिंग काउंटर होता है, जिसमें सुबह 10:30 बजे से 1:30 बजे तक अपनी शिकायत की जा सकती है...!
उपभोक्ता अदालत की फीस
- 1 लाख रुपए तक की फीस के लिए ₹100
- 2 से 5 लाख रुपए तक के सामान के लिए ₹200
- 5 से10 लाख रुपए तक के सामान के लिए ₹400
- 10 से 20 लाख तक के सामान के लिए ₹500
- 20 लाख से 50 लाख तक के मामलों के लिए ₹2000
- 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक के मामलों के लिए ₹4000
शिकायत कैसे की जा सकती है ?
- ऑफलाइन यानी कोर्ट में जाकर
- 1800114000 या 14404 पर कॉल करके
- एसएमएस के माध्यम से इस 8130009809 पर
- ऑनलाइन इस साइट पर की जा सकत
किस तरह की शिकायत नहीं की जा सकती है ?
- सूचना के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की शिकायत नहीं की जा सकती है.
- अगर किसी मामले में पहले से ही कोई मामला चल रहा है तो उस मामले में शिकायत नहीं की जा सकती है.
- विदेशी सरकारों के खिलाफ शिकायत नही की जा सकती.
- धार्मिक मामलों की शिकायत नहीं की जा सकती है.
- कोर्ट को या ऑनलाइन शिकायत करते समय कोई सलाह भी नहीं दी जा सकती है.
- वास्तविक मामले के अलावा कोई अन्य शिकायत नहीं की जा सकती है.

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